पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
चर्चा में क्यों ?
- भारत शांति अधिनियम, 2025, विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन और स्वदेशी प्रौद्योगिकी की सहायता से परमाणु ऊर्जा को राष्ट्रीय विकास के लिए एक सुरक्षित, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार आधार के रूप में मजबूत कर रहा है।
परमाणु ऊर्जा
- परमाणु ऊर्जा संयंत्र परमाणु विखंडन (Nuclear Fission) नामक एक अच्छी तरह नियंत्रित प्रक्रिया में उत्पन्न ऊष्मा से ऊर्जा का उत्पादन करते हैं।
- ऊष्मा पानी को उबालती है और भाप जनरेटर से जुड़े टरबाइन को घुमाती है।
- इस बिजली का उपयोग घरों, उद्योगों और आवश्यक सेवाओं को ऊर्जा प्रदान करने के लिए किया जाता है।
- यह पूरी प्रक्रिया स्थापित सुरक्षा अवरोधों और एक प्रभावी नियामक ढाँचे के अंतर्गत होती है।

भारत में परमाणु ऊर्जा की स्थिति
- वर्ष 1969 में तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन की स्थापना के बाद से यह भारत की विकास यात्रा का हिस्सा रही है।
- यह आज के घरों, उद्योगों और आर्थिक विकास को विश्वसनीय कम-कार्बन बिजली प्रदान करती है।
- भारत में 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर हैं, जिनकी स्थापित क्षमता 8.78 GW है। 7.5 GW की स्थापित क्षमता वाली नौ रिएक्टर इकाइयाँ विकासाधीन हैं।
- भारत ने वर्ष 2026 में कलपक्कम में दुनिया का पहला परमाणु प्रक्रिया-ऊष्मा आधारित हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र शुरू किया।
- स्वदेशी प्रौद्योगिकी स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा तथा भारत के नेट-जीरो और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्यों में सहायता करती है।
- सरकार ने फ्लीट मोड में स्वदेशी रूप से उत्पादित 10 प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWRs) तथा दो 500 MW फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBRs) के लिए परियोजना-पूर्व गतिविधियों को भी मंजूरी दी है।

उठाए गए कदम और विभिन्न विकास
भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम: भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम, जिसकी परिकल्पना डॉ. होमी जे. भाभा ने 1954 में की थी, स्वदेशी संसाधनों के उपयोग और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है।
- चरण I में ईंधन के रूप में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करने वाले PHWRs तथा खर्च किए गए ईंधन के पुनर्संसाधन के माध्यम से प्लूटोनियम की पुनर्प्राप्ति की जाती है।
- चरण II फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों पर आधारित है, जो बिजली उत्पन्न करने के लिए प्लूटोनियम का उपयोग करते हैं और थोरियम से यूरेनियम-233 सहित अधिक विखंडनीय पदार्थ का उत्पादन भी करते हैं। इससे चरण III का मार्ग प्रशस्त होता है, जिसमें भारत के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करने के लिए U-233 का इस्तेमाल किया जाएगा।
- अप्रैल 2026 में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई, जब कलपक्कम स्थित PFBR ने पहली बार क्रिटिकलिटी प्राप्त की और चरण II की शुरुआत हुई।

- न्यूक्लियर एनर्जी मिशन ने स्वदेशी SMRs के विकास के लिए ₹20,000 करोड़ निर्धारित किए हैं, जिसका लक्ष्य 2033 तक कम से कम पाँच SMRs को संचालन में लाना है।
- विकसित भारत के लिए न्यूक्लियर एनर्जी मिशन का लक्ष्य 2047 तक 100 GW की परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
- केंद्रीय बजट 2025-26 में स्वदेशी स्मॉल मोड्यूलर रिएक्टर्स के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए।
- शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के सुरक्षित, संरक्षित और भविष्य के लिए तैयार विकास के मौजूदा ढाँचे पर आधारित है।
- भारत परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और सेफगार्ड्स के लिए इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के साथ निकटता से कार्य करता है।
अनुप्रयोग
- ऊर्जा: स्थापित क्षमता की प्रति इकाई कार्बन उत्सर्जन के संदर्भ में परमाणु ऊर्जा भारत का सबसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है।
- वित्तीय वर्ष 2025–26 में परमाणु ऊर्जा की 1 गीगावाट क्षमता ने लगभग 5.4 मिलियन टन CO2 समतुल्य उत्सर्जन को रोकने में मदद की।
- स्वास्थ्य सेवा: परमाणु प्रौद्योगिकी रोगों की प्रारंभिक पहचान, सटीक कैंसर उपचार और उन्नत चिकित्सा अनुसंधान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है।
- परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और हरीश-चंद्र अनुसंधान संस्थान (HRI) जैसे अनुसंधान संस्थान स्वदेशी रेडियोफार्मास्यूटिकल्स, उन्नत इमेजिंग प्रौद्योगिकियों और नवीन कैंसर उपचारों का विकास कर रहे हैं।
- स्वदेशी विकिरण प्रौद्योगिकी ने 1.53 करोड़ चिकित्सा उपकरणों को भी निष्फल किया, जिससे रोगी सुरक्षा में सुधार हुआ और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संक्रमणों में कमी आई।
- कृषि: परमाणु प्रौद्योगिकी विकिरण-प्रेरित उत्परिवर्तन (radiation-induced mutagenesis) और संकरण के उपयोग द्वारा उन्नत फसल किस्मों के उत्पादन के माध्यम से कृषि में योगदान देती है।
- इन किस्मों में अधिक उपज, बड़े बीज आकार, बेहतर गुणवत्ता संबंधी विशेषताएँ, शीघ्र परिपक्वता तथा सूखा, गर्मी, लवणता और रोगों के प्रति अधिक सहनशीलता होती है।
- खाद्य भंडारण: विकिरण प्रौद्योगिकी कृषि उपज, मछली और मसालों की शेल्फ लाइफ बढ़ाकर तथा खराब होने की प्रक्रिया को कम करके खाद्य संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- आम की शेल्फ लाइफ बढ़ने से समुद्री मार्ग द्वारा कम लागत वाला निर्यात संभव हुआ है, जबकि प्याज और आलू की शेल्फ लाइफ बढ़ने से खराब होने में कमी आती है और किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने कई खाद्य पदार्थों के विकिरण प्रसंस्करण की अनुमति दी है।
- खनन एवं दुर्लभ मृदा तत्व: परमाणु प्रौद्योगिकी भारत के महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा तत्व पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायता कर रही है।
- उन्नत परमाणु विश्लेषणात्मक तकनीकों का अनुप्रयोग खनिज संसाधनों की खोज, लक्षण-निर्धारण और प्रसंस्करण का आधार है, जिससे अयस्क के आकलन, निष्कर्षण और गुणवत्ता नियंत्रण की सटीकता में सुधार होता है।
- भारत ने दुर्लभ मृदा तत्वों के लिए अपना पहला सर्टिफाइड रेफरेंस मैटेरियल (CRM) – फेरोकार्बोनेटाइट (FC) – BARC B1401 जारी किया है। यह भारत में अपनी तरह का पहला और विश्व में चौथा है।
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: परमाणु प्रौद्योगिकी में स्वदेशी अनुसंधान और उन्नत सामग्री विकास ने भारत में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित होने में सहायता की है।
- उच्च-शुद्धता वाले समस्थानिक और विशेषीकृत सामग्रियाँ, जो सेमीकंडक्टर के निर्माण में महत्वपूर्ण हैं तथा सटीक निर्माण, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और रणनीतिक प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों को सक्षम बनाती हैं, परमाणु प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके उत्पादित की जाती हैं।
- भारत ने सेमीकंडक्टर में उपयोग के लिए तलचर में अपनी पहली इलेक्ट्रॉनिक्स ग्रेड (99.8%) बोरोन-11 संवर्धन सुविधा स्थापित की है।
- हरित हाइड्रोजन: हाइड्रोजन संभवतः भविष्य का एक महत्वपूर्ण ऊर्जा वाहक होगा और स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा प्रणालियों की ओर संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- परमाणु ऊर्जा में निरंतर ऊर्जा और उच्च-तापमान प्रक्रिया ऊष्मा के संयोजन से कार्बन-मुक्त हाइड्रोजन का उत्पादन करने की क्षमता है।
- सुरक्षा उपाय:भारतीय परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की योजना और विकास डिफेंस-इन-डेप्थ (Defence-in-Depth) के सिद्धांत पर किया जाता है, अर्थात दुर्घटनाओं और रेडियोधर्मी पदार्थों के रिसाव को रोकने के लिए कई सुरक्षा परतें, अनावश्यकता वाले तंत्र (redundant systems) और भौतिक अवरोध मौजूद होते हैं।
- संयंत्रों का निर्माण भूकंप, बाढ़, चक्रवात और सुनामी का सामना करने के लिए किया जाता है तथा नियमित निगरानी, आपातकालीन शटडाउन और शीतलन प्रणालियों द्वारा इन्हें और अधिक सुरक्षित किया जाता है।
- विकिरण सुरक्षा ALARA अवधारणा, AERB द्वारा निर्धारित खुराक सीमाओं, समर्पित हेल्थ फिजिक्स यूनिट्स, शील्डिंग, सुरक्षात्मक उपकरणों और प्रशिक्षण के अनुसार सुनिश्चित की जाती है।
- रेडियोधर्मी अपशिष्ट का उपचार किया जाता है, AERB के मानदंडों के अनुसार नियंत्रित रूप से छोड़ा जाता है, इंजीनियर्ड निपटान सुविधाओं में निपटाया जाता है और पर्यावरण में नियमित रूप से निगरानी की जाती है।
- भारत में BARC ने उच्च-स्तरीय रेडियोधर्मी अपशिष्ट को दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए स्थिर काँच के ब्लॉकों में विट्रीफिकेशन करने की स्वदेशी विधि विकसित की है।
निष्कर्ष
- भारत का परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता, जनकल्याण और उच्चतम सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने की भारत सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रकटीकरण है।
- परमाणु प्रौद्योगिकी केवल स्वच्छ बिजली का उत्पादन करके ही नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन ला रही है।
- भारत न्यूक्लियर एनर्जी मिशन फ़ॉर विकसित भारत और शांति अधिनियम जैसे परिवर्तनकारी कार्यक्रमों के मार्गदर्शन में एक मजबूत, नवाचार-संचालित और भविष्य के लिए तैयार परमाणु पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित कर रहा है।
- मजबूत नियामक निगरानी, बेहतर रिएक्टर डिजाइन और व्यापक आपातकालीन तैयारियाँ परमाणु सुविधाओं के सुरक्षित और संरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने में निरंतर सहायता कर रही हैं।
- जैसे-जैसे भारत विकसित भारत 2047 और 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, परमाणु ऊर्जा सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय समृद्धि का एक मौलिक स्तंभ बनी रहेगी।
प्रमुख शब्दावली
- परमाणु ईंधन (Nuclear fuel) वह सामग्री है जिसे ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए परमाणु रिएक्टर के अंदर डाला जाता है।
- नाभिकीय विखंडन (nuclear fission) द्वारा इसके परमाणुओं को विभाजित किया जाता है, जिससे बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है। यह ऊष्मा पानी को भाप में बदल देती है। भाप टर्बाइनों को घुमाती है। इसका उपयोग विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है।
- सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले परमाणु ईंधनों में प्राकृतिक यूरेनियम (Natural Uranium), यूरेनियम-235 (U-235), निम्न-संवर्धित यूरेनियम (LEU), प्लूटोनियम-239 (Pu-239), और मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन शामिल हैं।
- निम्न-संवर्धित यूरेनियम (LEU) का उपयोग संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा और रूस सहित अधिकांश देशों में हल्के जल रिएक्टरों (Light Water Reactors) में किया जाता है।
- भारत में दाबित भारी जल रिएक्टर (Pressurised Heavy Water Reactors—PHWRs) हैं, जो प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करते हैं और इन्हें यूरेनियम संवर्धन की आवश्यकता नहीं होती।
- भारत में Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) के लिए MOX ईंधन का भी उपयोग किया जाता है।
- भारत में यूरेनियम के भंडार निम्न-श्रेणी के हैं और इसलिए आयात के माध्यम से इनकी पूर्ति आवश्यक होती है।
- हालाँकि, भारत में थोरियम (Th-232) के बड़े भंडार हैं। यह एक उर्वर (fertile), न कि विखंडनीय (fissile) रेडियोधर्मी खनिज है, जो मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड की तटीय रेत में उपलब्ध है।
- नाभिकीय अभिक्रिया (Nuclear reaction) वह प्रक्रिया है जिसमें परमाणु के नाभिक से ऊर्जा मुक्त होती है, सामान्यतः विखंडन या संलयन द्वारा।
- परमाणु संयंत्रों में विखंडन का उपयोग किया जाता है। एक न्यूट्रॉन यूरेनियम या प्लूटोनियम के नाभिक से टकराता है।
- यह विभाजित होकर ऊष्मा और अन्य न्यूट्रॉन मुक्त करता है, जो एक श्रृंखला अभिक्रिया (chain reaction) उत्पन्न करते हैं।
- इस श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित किया जाता है।
- ऊष्मा पानी को भाप में बदलती है, जो आगे टर्बाइनों को घुमाती है और जनरेटरों को संचालित करती है, जिससे ऊर्जा का उत्पादन होता है।
- संलयन (Fusion) हल्के परमाणु नाभिकों को आपस में जोड़कर बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा मुक्त करता है और यही प्रक्रिया सूर्य तथा तारों को ऊर्जा प्रदान करती है। लेकिन वाणिज्यिक विद्युत उत्पादन के लिए संलयन प्रौद्योगिकी अभी भी विकसित की जा रही है।
- परमाणु रिएक्टर (Nuclear reactor): एक परमाणु विद्युत संयंत्र का निर्माण परमाणु रिएक्टर के चारों ओर किया जाता है।
- नियंत्रित विखंडन ऊष्मा उत्पन्न करता है, जिसे परमाणु विद्युत संयंत्र ईंधन, नियंत्रण छड़ों (control rods), शीतलक (coolant) और सुरक्षा प्रणालियों का उपयोग करके विद्युत में परिवर्तित करते हैं।
- भारत में मुख्यतः दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWRs) हैं, लेकिन BWRs और PWRs भी हैं। भारत थोरियम-आधारित विद्युत की ओर संक्रमण को सुगम बनाने के लिए फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBRs) विकसित कर रहा है।
- भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएटर्स (SMRs) को भी बढ़ावा दे रहा है, जिनकी क्षमता सामान्यतः 300 MWe तक होती है और जो मॉड्यूलर उत्पादन, कम निर्माण समय तथा लचीले स्थान-निर्धारण के कारण विशिष्ट होते हैं।
- परमाणु अपशिष्ट (Nuclear waste) वह रेडियोधर्मी पदार्थ है जो किसी परमाणु विद्युत संयंत्र के संचालन के दौरान उत्पन्न होता है।
- इसमें प्रयुक्त परमाणु ईंधन (spent nuclear fuel) तथा सुरक्षात्मक कपड़े, फिल्टर, उपकरण और अन्य ऐसी वस्तुएँ शामिल होती हैं जो संयंत्र में संचालन के दौरान रेडियोधर्मी हो जाती हैं।
- चूँकि यह विकिरण उत्सर्जित करता है, इसलिए मानव और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इसे कठोर सुरक्षा आवश्यकताओं के तहत विनियमित किया जाता है।
स्रोत: PIB
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संक्षिप्त समाचार 29-08-2026